इन अरबों लोगों के लिए लॉक-डाउन, क्वारनटाइन, सामाजिक दूरी जैसे शब्दों का कोई मतलब नहीं है। ये वही लोग हैं जो सामाज का पुन:उत्पादन भी करते हैं और लाखों उपयोगी वस्तुओं का निर्माण करने के लिए कड़ी मेहनत करते हैं; जिन्हें ख़ुद अपनी मेहनत का कोई लाभ नहीं मिलता, जिनकी मेहनत हड़प कर मुट्ठी-भर लोग अमीर हो गए हैं। ये अमीर अब इन्हें अमीर बनाने वाले यथार्थ से डर कर अपने धन के साथ पर्दों के पीछे छिपे हुए हैं। ...