कमज़ोर सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली का कारण अमीर बॉन्डहोल्डर्स और अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) द्वारा लागू की गईं बजट कटौतियाँ हैं, जिन्हें केवल अपने ऋण भुगतान से मतलब है और इस बात की बिलकुल परवाह नहीं है कि ये पैसा सार्वजनिक स्वास्थ्य, सार्वजनिक शिक्षा और लोक कल्याण कार्यों के बजट में कटौतियाँ करके आता है।  सार्वजनिक क्षेत्रों में  लगातार घटते सरकारी फंड और स्वास्थ्यकर्मियों की कमी के कारण पूँजीवादी देशों की स्वास्थ्य प्रणालियाँ कोविड-19 महामारी फैलाने से पहले ही कमजोर हो चुकी थीं।