आँकड़ों और अनुमानों के अनुसार आधी मानव आबादी के पास भोजन की अपर्याप्त पहुँच है, जबकि मानव उपभोग के लिए विश्व स्तर पर उत्पादित खाद्य का लगभग एक तिहाई बर्बाद हो जाता है। इतनी बड़ी बर्बादी मुनाफ़ों पर टिकी व्यवस्था का परिणाम है, जिसमें सार्वजनिक वितरण प्रणाली के माध्यम से भूखों को भोजन देने के बजाय उसे बर्बाद करना अधिक लाभदायक समझा जाता है। यही वर्ग युद्ध का चरित्र है।