English Español Português Русский Deutsch 简体中文

Judy Seidman, Imperialism Stops Here, 2020.

जूडी सीडमैन, साम्राज्यवाद यहाँ रुक जाता है, 2020

प्यारे दोस्तों,

ट्राईकॉन्टिनेंटल: सामाजिक शोध संस्थान की ओर से अभिवादन।

1965 में, घाना के प्रधान मंत्री क्वामे नक्रुमा ने एक साहसिक किताबनियोकलोनीयलिज़म: लास्ट स्टेज ऑफ़ इम्पीरीयलिज़मप्रकाशित की थी। इस किताब में, नक्रुमा ने विस्तार से दिखाया था कि कैसे यूरोप और उत्तरी अमेरिका की बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ, अपनी सरकारों के सहयोग से अफ़्रीका के नये राष्ट्रों की आकांक्षाओं को दबाती हैं। इसके उदाहरण के रूप में, नक्रुमा ने अपने देश, घानाजिसे 1957 तक इसके औपनिवेशिक नाम गोल्ड कोस्टसे जाना जाता थाकी परिस्थितियों का विश्लेषण किया था।

पुरानी औपनिवेशिक कंपनियों में से एक, ऐशैंटी गोल्डफ़ील्ड्स (एक ब्रिटिश कंपनी) घाना के स्वर्ण खदानों के श्रमिकों के कठिन श्रम से शानदार मुनाफ़ा कमाती रही थी; और जब नक्रुमा की सरकार ने कंपनी पर लगने वाला टैक्स बढ़ाने की कोशिश की तो लंदन के अख़बारों ने इसके ख़िलाफ़ ज़बरदस्त ग़ुस्सा ज़ाहिर किया। नक्रुमा ने किताब में लिखा कि घाना के लोगों को सोने काकेवल नाममात्र प्रतिफलमिलता है, जबकि ऐशैंटी गोल्डफ़ील्ड्स के यूरोपीय शेयरधारकों के हिस्से में अत्यधिक लाभांश आता है। नक्रुमा ने लिखा, यही नियोकलोनीयलिज़म (नवउपनिवेशवाद) है।

 

Madhuri Shukla, Imperial Interventions, USA.

माधुरी शुक्ला, साम्राज्यवादी हस्तक्षेप, यू एस ए।

नक्रुमा की किताब में शामिलग़ैरज़िम्मेदाराना विश्लेषणोंसे नाराज़ संयुक्त राज्य अमेरिका की सरकार ने उन्हें सबक़ सिखाने का निश्चय किया और खाद्य आयात की लागत पूरी करने के लिए मिलने वाली अल्पकालिक सहायता के 30 करोड़ डॉलर देने से इनकार कर दिया। लेकिन नक्रुमा इससे परेशान नहीं हुए। उन्होंने हनोई (वियतनाम) जाकर हो ची मिन्ह से मिलने का फ़ैसला किया। उनकी इस यात्रा के दौरान, अमेरिकी सरकार की केंद्रीय ख़ुफ़िया एजेंसी और ब्रिटिश ख़ुफ़िया एजेंसी (एमआई 6) की सहायता से घाना की सेना ने देश की सत्ता पर क़ब्ज़ा कर लिया। और इसके साथ ही नक्रुमा के द्वारा देश को संप्रभु बनाने और अपनी जनता के लिए गरिमापूर्ण जीवन जीने की परिस्थितियों का निर्माण करने के लिए की जा रही कोशिशों को किनारे कर दिया गया।

देश की संपत्ति बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ लूटती रहीं। साम्राज्यवाद के भयावह अन्याय ने एक नया रूप ले लिया, घाना में जिसका प्रत्यक्ष औपनिवेशिक रूप 1957 में नक्रुमा के नेतृत्व में मिलने वाली आज़ादी के साथ पराजित हो गया था। साम्राज्यवादी शोषण के नये रूप को  नक्रुमा ने नवउपनिवेशवाद का नाम दिया था। उनके अनुसार नवउपनिवेशवाद का मतलब हैबिना उत्तरदायित्व की एक सत्ताऔर नवउपनिवेशवाद द्वारा शोषित लोगों के लिए इसका मतलब है ऐसाशोषण जिसकी कोई सुनवायी हो यह सिद्धांत अब भी उसी तरह काम कर रहा है।

 

Fabiola Sánchez Quiroz, La vida contra el Imperialismo, Mexico.

फेबियोला सांचेज़ क़िरोज़, ला विदा कोंत्रा एल इमपेरियालिस्मो (साम्राज्यवाद के ख़िलाफ़ जीवन), मैक्सिको।

 

साम्राज्यवादको एक पुरातनपंथी अवधारणा माना जाता है, और कहा जाता है कि ये हमारी मौजूदा दुनिया को समझने के लिए उपयोगी नहीं है। पर क्या कोई और अवधारणा हमें यह समझने में मदद कर सकती है कि विकासशील देशों के निजी और सार्वजनिक क्षेत्र के विदेशी ऋण पिछले एक दशक में क्यों बढ़ते गए हैं, और क्यों ये संसाधनों के धनी देश इस ऋणजो अब 11 ट्रिलियन डॉलर से भी ऊपर जा चुका हैका भुगतान नहीं कर पा रहे हैं? अकेले कौंगो लोकतांत्रिक गणराज्य के संसाधनों का कुल मूल्य कमसेकम 24 ट्रिलियन डॉलर है। कौंगो में अफ़्रीका के आधे जल संसाधन और जंगल होने के बावजूद, देश के 5.1 करोड़ निवासी पीने योग्य पानी से वंचित हैं और इसका एक ही कारण है, अफ़्रीका का संरचनात्मक रूप से अल्पविकसित होना। इस साल की शुरुआत में आई UNCTAD की एक रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया था कि साल 2020-2021 में 2.7 ट्रिलियन से 3.4 ट्रिलियन डॉलर के बीच की रक़म ऋण भुगतान में जाएगी (एक अन्य अनुमान के अनुसार ऋण भुगतान की ऊपरी सीमा 3.9 ट्रिलियन डॉलर हो सकती है, जिसमें से लगभग 3.5 ट्रिलियन डॉलर मूलधन के भुगतान पर ख़र्च होगा) ऋण निलंबित करना या रद्द करना उनकी योजना में शामिल नहीं है, क्योंकि इन क़र्ज़ों के माध्यम से ही सरकारों को नियंत्रण में रखा जा सकता है और बहुराष्ट्रीय निगमों अमीर बॉन्डहोल्डर्स के द्वारा देशों का धन छीनना जारी रखा जा सकता है।

 

 

 

ट्राईकॉन्टिनेंटल: सामाजिक शोध संस्थान के बिउनोस आयर्स कार्यालय में एमिलीयानो लोपेज़ द्वारा हाल में संपादित किताब वीन्स ऑफ़ साउथ आर स्टिल ओपन: डिबेट्स अराउंड इंपीरियलिज़म ऑफ़ आवर टाइममौजूदा समय के साम्राज्यवाद को समझने के लिए एक महत्वपूर्ण किताब है; इसमें प्रभात पटनायक, उत्सा पटनायक, जॉन स्मिथ, . अहमत टोनाक, एटीलियो बोरोन और गेब्रियल मैरिनो के लेख शामिल हैं। यह किताब साम्राज्यवादविरोधी संघर्ष के अंतर्राष्ट्रीय सप्ताह की अंतर्राष्ट्रीय प्रक्रिया के रूप में सामने आया है, जो 5 अक्टूबर को काराकास (वेनेजुएला) में सिमोन बोलिवर इंस्टीट्यूट और ट्राईकॉन्टिनेंटल द्वारा प्रायोजित एक संगोष्ठी के साथ शुरू हुआ और 10 अक्टूबर को साम्राज्यवाद विरोधी त्योहार के साथ इसकी समाप्ति होगी।

साम्राज्यवादविरोधी संघर्ष के अंतर्राष्ट्रीय सप्ताह ने भविष्य का एक घोषणापत्र जारी किया है, जिसे हमने यहाँ आपके लिए शामिल किया है:

Wacha, Imperialismo not found, Argentina.

वाचा, साम्राज्यवाद नहीं मिला, अर्जेंटीना।

 

भविष्य का घोषणापत्र

हम भूखों का मुक़ाबला करने के लिए, साम्राज्यवादी अपनी बंदूक़ें उठा लेते हैं। साम्राज्यवादियों का सामना करने के लिए, हम भूखे हथियारबंद होकर आगे बढ़ते हैं।

मानव जाति आज तेज़ी से फैलने वाले एक अदृश्य वायरस की चपेट में है; लेकिन हम लंबे समय से बेरोज़गारी, भूख, नस्लवाद, पितृसत्ता, असमानता और युद्ध जैसे वायरसों से जूझ रहे हैं। ये वायरस दुनिया के विभिन्न हिस्सों में अलगअलग तरीक़े से प्रकट होते हैं तथा श्रमिकों, किसानों और सामाजिक असमानता के प्रभाव को हर रोज़ अनुभव करने वाले लोगों पर ख़ास हमला करते हैं। हालाँकि, मुट्ठी भर लोगों को इस तबाही से फ़ायदा होता है। 

पूँजीवादी व्यवस्था के पास इन संकटों का कोई हल नहीं है; इसकी नीतियाँ खोखली हैं। सबको घर और भोजन देने के तरीक़े खोजने की बजाय, पूँजीपति तबाही की विशाल मशीनरियाँ बनाते हैं। उनके पुलिस बल और उनकी सेना अमीर देशों में मज़दूरों और ग़रीब देशों में मज़दूरों किसानों की ज़िंदगियाँ तबाह करने पर तुले हैं। यदि कोई ग़रीब देश अपनी संप्रभुता का प्रयोग करने की कोशिश करे, तो उसके ख़िलाफ़ सत्ता के सभी वित्तीय, राजनयिक और सैन्य शस्त्रगार इस्तेमाल किए जाते हैं। वो केवल हथियारों के माध्यम से बल्कि विचारों के माध्यम से भी अपना वर्चस्व बनाए रखते हैं; हमें ये समझाने की कोशिशें की जाती हैं कि उनके विचार ही सही विचार हैं।

पूँजीवादी व्यवस्था के प्रबंधक फट से अपनी बंदूक़ें भरते हैं और तान देते हैं दूर से ही दिख रहे अपने विरोधियों की ओर। वे घुस आते हैं हमारी ज़मीनों में अपने टैंक लेकर और हमारे घरों पर क़ब्ज़ा कर लेते हैं। प्रकृति को तहसनहस कर वे हमारी दुनिया नष्ट कर देते हैं। उनके लिए युद्ध भड़काना लोगों का पेट भरने से कहीं ज़्यादा आसान है। उनके लिए नस्लवाद और अंधराष्ट्रीयता का ज़हर फैलाना आसान है, बजाये ये स्वीकार करने के कि संकटों से घिरी हुई पूँजीवादी व्यवस्था महिलाओं द्वारा देखभाल के कामों में ख़र्च किए जाने वाले श्रम और बेहद ख़राब परिस्थितियों में काम करने को मजबूर खदान श्रमिकों और कारख़ाना मज़दूरों के श्रम पर टिकी हुई है।

 

दुनिया भर के जनआंदोलनों के नेताओं ने भविष्य का घोषणापत्र पढ़ा।

पृथ्वी जल रही है, नये नये वायरस उभर रहे हैं, पूरी दुनिया में भुखमरी तेज़ी से फैल रही है, लेकिन इन सब के बावजूद हमइस दुनिया के अधिकांश लोगएक बेहतर भविष्य की उम्मीद रखते हैं। हम उम्मीद करते हैं, मुनाफ़े और विशेषाधिकारों से मुक्त एक दुनिया की, पूँजीवाद और साम्राज्यवाद से मुक्त एक दुनिया की, जहाँ मानवता और ज़िंदगी के गीत गाए जाएँगे। हमारे दिल उनकी बंदूक़ों से बड़े हैं; हमारा प्यार और हमारे संघर्ष उनकी लालच और उनकी उदासीनता को हरा देंगे।

हमारे आंदोलनों ने कई बीज बोए हैं। ज़रूरत है कि हम उन्हें पानी दें, उनको सींचें और यह सुनिश्चित करें कि वे बीज खिलें और फलें। हम एक ऐसा भविष्य बनाएँगे जहाँ ज़िंदगी मुनाफ़े से ज़्यादा प्यारी हो। एक ऐसा भविष्य जो नस्लवादी युद्धों के बजाय लोगों के आपसी सहयोग का भविष्य होगा। एक ऐसा भविष्य जिसमें लोगों के बीच सामाजिक पदानुक्रम के भेदभावों की बजाये पारस्परिक गरिमा के रिश्ते होंगे।

अंधेरा होने पर ही हम तारे देख पाते हैं। और अब काफ़ी अंधेरा हो चुका है।

 

Choo Chon Kai, Sharing Economy, Malaysia.

चू चून काई, अर्थव्यवस्था साझा करना, मलेशिया।

 

इस न्यूज़लेटर में शामिल चित्र ट्राईकॉन्टिनेंटल: सामाजिक शोध संस्थान द्वारा आयोजित साम्राज्यवादविरोधी पोस्टर प्रदर्शनी से लिए गए हैं। यह हमारी तीसरी प्रदर्शनी है, जिसका विषय थासाम्राज्यवाद इस प्रदर्शनी में छब्बीस देशों के तिरसठ कलाकारों ने हिस्सा लिया। हमारी पहली दो प्रदर्शनियों के विषय थेनवउदारवादऔरपूँजीवादऔर हमारी चौथी अंतिम प्रदर्शनी का विषय होगाहाइब्रिड युद्ध

 

 

9 अक्टूबर 1967 को बोलीविया में सीआईए के एजेंटों ने चे ग्वेरा की हत्या कर दी। उन्होंने उससे दो दिन पहले चे को पकड़ा था औरचे को जीवित रखने के आदेशों के बावजूदउन्हें कहा गया था कि वे चे को मार डालें। साम्राज्यवादविरोधी संघर्ष के अंतर्राष्ट्रीय सप्ताह में लगभग बीस वाम प्रकाशकों ने मलयालम से लेकर स्पैनिश जैसी बीस भाषाओं मेंचेके नाम से एक पुस्तक जारी की है। इस किताब में चे के दो प्रमुख लेखक्यूबा में व्यक्ति तथा समाजवाद (1965) और, ट्राईकॉन्टिनेंटल के लिए संदेश (1967) दिए गए हैं। हवाना (क्यूबा) स्थित इंस्टीट्यूटो चे ग्वेरा की मारिया डेल कारमेन एरियेट गार्सिया ने इस किताब की प्रस्तावना लिखी है और किताब की भूमिका ट्राईकॉन्टिनेंटल: सामाजिक शोध संस्थान के वरिष्ठ फ़ेलो ऐजाज़ अहमद के द्वारा लिखी गई है। इस ईबुक को आप हमारे वेबसाइट से मुफ़्त में डाउनलोड कर सकते हैं।

जनवरी 1965 में चे ने घाना की यात्रा की। वहाँ उन्होंने क्यूबा, ​​लैटिन अमेरिका और 1961 में हुई कौंगो के नेता पैट्रिस लुमुम्बा की हत्या के बारे में बातचीत के सिलसिले में नक्रुमा से मुलाक़ात की। नक्रुमा और चे दोनों के दिमाग़ में कौंगो था; जब चे ने तंज़ानिया में सेनानियों की एक टुकड़ी बनाई, तो उसका नाम उन्होंनेपैट्रिस लुमुम्बा ब्रिगेडरखा। लुमुम्बा की हत्याजिसमें बेल्जियम की ख़ुफ़िया एजेंसी और सीआईए का हाथ थासे नक्रुमा और चे दोनों आहत थे। एक साल बाद, सीआईए द्वारा समर्थित तख़्तापलट में नक्रुमा की सरकार हटा दी गई। इसके दो साल बाद, चे को सीआईए के गुंडों ने मार डाला। तीसरी दुनिया के अधिकांश देशों में संप्रभुता बढ़ाने की विभिन्न कोशिशों को कुचलने में सीआईए की कार्रवाइयों का प्रभाव दिखाई देता है। इस समय ज़रूरी है कि हम 9 अक्टूबर के दिन को सीआईए को समाप्त करने के अंतर्राष्ट्रीय दिवस के रूप में मनाएँ।

स्नेहसहित,

विजय।

सतरूपा चक्रवर्ती, ट्राइकॉन्टिनेंटल: सामाजिक अनुसंधान संस्थान (भारत), शोधार्थी। 

मैं लेखों तथा साक्षात्कार के माध्यम से पिछले कुछ सालों में छात्रों के आंदोलनों तथा उनकी यादों के दस्तावेज़ीकरण की एक परियोजना पर काम कर रही हूँ। जो उनके प्रतिरोध की आवाज़ों, संघर्षों के उनके अनुभव तथा सत्ता में बैठे नवउदारवादी और हिंदुत्ववादी दक्षिणपंथी शक्ति द्वारा उच्च शिक्षा पर किए गए हमले और उनकी जवाबी कार्रवाई को सामने लेकर आएगा।

Download as PDF